"हठी दोस्त"
दोस्तों के लिए अच्छा सोचूँ तो
तो दोस्त बुरा मान जाते हैं
दोस्ती का हक़ अदा करुँ तो
दुश्मन आड़े आ जाते हैं
दोस्तों के लिए अच्छा चाहूँ तो
दोस्त ही ग़लत समझते हैं
दोस्तों को अपना मानूँ तो
दोस्त ही पराया मानते हैं
दोस्तों पर हक़ अदा करुँ तो
दोस्त मुश्किल से अपनाते हैं
— Manohar Shimpi















