आप को छाँव से गुज़रना है
धूप को पेड़ पर बिखरना है
आप के हाथ से सँवरना है
चाँद को और भी निखरना है
इश्क़ कितना है पूछ नज़रों से
क्योंकि होंठों ने तो मुकरना है
आप के दिल में अब मुझे अपनी
धड़कनों को तलाश करना है
फूल कलियाँ चुरा लिए हैं सब
आशिक़ों को कहाँ सुधरना है
— Meenakshi Masoom















