रिमझिम रिमझिम प्यार लुटाना लगता है

बादल धरती का दीवाना लगता है

उन की यादों की इन शोख़ हवाओं से
अच्छा इस दिल को सुलगाना लगता है

मुझ को बुरा मुहब्बत की तकरारों में
उन हाथों का हाथ छुड़ाना लगता है

शब-भर शम्अ' जले शीशे के पहरे में
बेबस बुझा बुझा परवाना लगता है

गोद में जब सर रखता है महबूब मेरा
वो मौसम वो वक़्त सुहाना लगता है

— Meenakshi Masoom

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