गौरी बिन शंभु को अब मैं कैसे पूरा कर दूँ
ऐसी तस्वीर से क्या कैलास अधूरा कर दूँ
मैं ने तस्वीर बनाई एक अधूरी तेरी
गर तू बोले तो अब मैं उस को पूरा कर दूँ
तुझ को अपने हाथों से पूरा करते करते
ऐसा न हो ख़ुद को ही मैं आज अधूरा कर दूँ
भोले तुझ को मैं शीघ्र प्रसन्न करूँ कैसे अब
क्या अर्पित इन कोमल हाथों से धतूरा कर दूँ
इक गौरी शंभु की सी अपनी तस्वीर बना कर
नाचूँ मैं ख़ुशी से अपने मन को मयूरा कर दूँ
— Meenakshi Masoom















