मैं सौंप चुकी उस को ये तन-मन उसे कहना

बिन उस के मुझे भाए न जीवन उसे कहना

जब तक वो भिगोए न मुझे प्रेम के जल से
महके न मिरी देह का चंदन उसे कहना

ख़ुद आ के सजाए वो मुझे हाथ से अपने
पहनाए वो पायल हो कि बंधन उसे कहना

सोना करूँ हर लम्हे को तस्वीर से उस की
पारस लिए बैठी है लुहारन उसे कहना

हर अंग निखरता है बहारों का फ़क़त जब
पतझड़ मले हर शाख़ पे उबटन उसे कहना

— Meenakshi Masoom

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