बे-ख़बर मेरी तलब से हैप्यास जिस की दिल को कब से हैइन लकीरों में नहीं शामिलनाम होंठों पे जो कब से हैएक मुझ से ही नहीं वर्नाराब्ता 'अंकुर' का सब से है— Ankur Mishra