सब्र करिए दिल को मेरे सब्र आने परदास्तान-ए-इश्क़ का हासिल सुनाऊँगाजंग इक ऐसी कि जिसमें हारना तय थामैं लड़ा ऐसे कि मानो जीत जाऊँगा— Mohit Dixit