Top 20 Bachpan Shayari

Bachpan shayari captures the innocence, simplicity, and joy of childhood days. It brings back sweet yaadein of carefree moments, school life, and pure happiness that once filled our lives. These verses beautifully reflect the nostalgia of a time when life was simple and hearts were light.

बचपना ऐ लड़को तुम सेे कभी छूटता ही नहीं जवान होना तो बस लड़कियों को आता है — Kumar Vishwas
चारों ओर हज़ारों रावण हर रावण के सर हैं दस लेकिन याद रहे सब कुछ दो चार दिनों का खेल है बस — Nomaan Shauque
अब तक हमारी उम्र का बचपन नहीं गया घर से चले थे जेब के पैसे गिरा दिए — Nashtar Khaanqahi
मान जाता था ख़ुद ही मैं रूठ के अपने आप बचपन में भी मुझ को कोई मनाता नहीं था — karan singh rajput
खेल ज़िंदगी के तुम खेलते रहो यारो हार जीत कोई भी आख़िरी नहीं होती — Hastimal Hasti
देखी है पत्तों की शोख़ी उस बचपन को कैसे भूले — Meem Alif Shaz
है वही कश्ती पुरानी है वही दरिया मेरा जिस पे तू आने न पाया है वही रस्ता मेरा मैं मिरी मसरूफ़ियत से तंग आ जाता हूँ दोस्त मुझ को सीने से लगा के वक़्त कर ज़ाया' मेरा अपनी वहशत का तक़ाज़ा ढूंढता हूँ दर-ब-दर ले गया है कोहकन जिस रोज़ से तेशा मेरा याद कर कूचा-नवर्दी,याद कर उल्फ़त के दिन याद कर बातें मेरी और याद कर चेहरा मेरा जब हवाएँ थक गईं थीं कोशिशें कर दश्त में रेत तब रक्साँ हुई थी चूम कर साया मेरा बारिशों को मौसमों का खेल सब कहते हैं पर रो पड़े थे अब्र-पारे जान कर क़िस्सा मेरा आँख वो हँसती रही तो खिल उठे सूखे गुलाब आँख वो रोने लगी तो रो पड़ा सहरा मेरा ख़ुसरवान-ए-शहर मैं हो जाऊँगा इक लम्स से और फ़क़त इक दीद से भर जाएगा कासा मेरा मैं किताबों के जहाँ का एक ख़ुशक़िस्मत किताब नाव बच्चों ने बनाया फाड़ कर सफ़्हा मेरा उस नज़र को ख़्वाहिशों का शौक़ दे मेरा ख़याल उस जबीं को रौशनी देता रहे बोसा मेरा मैं मुसलसल बंद करता हूँ मगर फिर दम-ब-दम याद उस की खोलती जाती है दरवाज़ा मेरा — Prasoon
लोग कहते हैं कि इस खेल में सर जाते हैं इश्क़ में इतना ख़सारा है तो घर जाते हैं — Shakeel Jamali
दर्द की राह को पार हम ने किया खेल की उम्र में प्यार हम ने किया — Govind kumar
मोहब्बत खेल है गर तो बताओ खिलौना दिल से भी सस्ता है कोई — Deepika Jain
खेल का हिस्सा थे जब तक खेल बस इक खेल था राज़ सारे खुल गए जब मैं तमाशाई हुआ — shahnawaaz khan
तकल्लुफ़ छोड़ कर आओ उसे फिर से जिया जाए हमारा बचपना जो एल्बमों में क़ैद रहता है — Shiva awasthi
बूढ़ी माँ का शायद लौट आया बचपन गुड़ियों का अम्बार लगा कर बैठ गई — Irshad Khan Sikandar