कभी पास आ कर हँसाया बहुत ही
कभी याद बनकर रुलाया बहुत ही
सितम-गर सितम ढा चले जा रहे थे
न रोके रुका दिल मनाया बहुत ही
दुआ का दवा का असर ही न होता
किसी बद-दुआ ने सताया बहुत ही
कभी मौसमों से मिले रंग रंगी
कभी मौसमों ने रुलाया बहुत ही
सनम बे-क़दर था क़दर ही न जानें
हमें यार ने आज़माया बहुत ही
— Mrkknathji















