दवा के साथ मिला बन गया दवा पानी
मिला जो ज़हर में तो क़हर बन गया पानी
ये काइनात के क़बिज़ है तीन हिस्सों पर
अज़ीब हाल है बोतल में बिक रहा पानी
सटे-सटे से मकानों में फ़ासिले हैं रवाँ
बदल चुका है मेरा शहर भी हवा पानी
यहीं सिखाया बुज़ुर्गों ने, बेटे रोते नहीं
मैं चाह कर भी न आँखों में ला सका पानी
बता सकेगी वही नीर की सही क़ीमत
मिला फ़क़त जिसे पनघट से इक घड़ा पानी
ये दिल बिहार हुआ जा रहा मुहब्बत में
सनम की याद का सर से गुज़र रहा पानी
वो कह रहा था बहुत खुश हूँ जी़स्त से ‘मौजी’
पर उसकी आँख का सब कुछ बता गया पानी
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