dil ki khaatir use paane ki nahin thaanii thii | दिल की ख़ातिर उसे पाने की नहीं ठानी थी

  - Nadir Ariz

दिल की ख़ातिर उसे पाने की नहीं ठानी थी
वो तो इक दोस्त ने शोले को हवा दे दी थी

मुझको तंग आके खड़ा होना पड़ा बीच सड़क
हाथ देता था कोई गाड़ी नहीं रुकती थी

ये दरीचे के बराबर का जो मंज़र है यहाँ
एक क्यारी थी जो फूलों से भरी रहती थी

रास्ता ख़त्म मकानों के तजावुज़ से हुआ
मैंने जब नक़्शा बनाया था गली रक्खी थी

उसको खोने में ज़माने ने मदद की मेरी
गाँठ ऐसी थी कि हाथों से नहीं खुलती थी

उसने पहचाना था उस रोज़ मुझे स्वेटर से
हमने इक दूजे की तस्वीर नहीं देखी थी

  - Nadir Ariz

Charity Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Nadir Ariz

As you were reading Shayari by Nadir Ariz

Similar Writers

our suggestion based on Nadir Ariz

Similar Moods

As you were reading Charity Shayari Shayari