राह में दुश्वार और तारिक़ जंगल आएँगे
हम से मिलने इस जगह पर कौन पागल आएँगे
ऐतिबार आता नहीं तो आज़मा कर देख ले
हम तेरे सब चाहने वालों में अव्वल आएँगे
फ़ोन की स्क्रीन तकते शाम हो जाएगी ख़त्म
दोस्त की नाराज़गी के बा'द सिग्नल आएँगे
इस लिए जगहें बदल कर ली है तस्वीरे तेरी
एक पहलू से ये मंज़र ना मुक़म्मल आएँगे
— Nadir Ariz















