सारी शिकस्त मेरी मेरे नसीब से हैं वरना तो हम कई बेहतर उस रक़ीब से हैंतलवार से नहीं और ख़ंजर से भी नहीं हैइन ज़ख़्मों का तअल्लुक़ मेरे हबीब से हैंतस्वीर तक अब उस की देखी नहीं है जातीजिस से मिरे मरासिम इतने क़रीब से हैंअब कौन मस'अले सुलझाएगा इस तरह केसब मस'अले यहाँ के बेहद मुहीब से हैं— Nakul kumar