सारी शिकस्त मेरी मेरे नसीब से हैं
वरना तो हम कई बेहतर उस रक़ीब से हैं
तलवार से नहीं और ख़ंजर से भी नहीं है
इन ज़ख़्मों का त'अल्लुक़ मेरे हबीब से हैं
तस्वीर तक अब उसकी देखी नहीं है जाती
जिस सेे मिरे मरासिम इतने क़रीब से हैं
अब कौन मस'अले सुलझाएगा इस तरह के
सब मस'अले यहाँ के बेहद मुहीब से हैं
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