ham na suljhaa paa.e ab tak ye mas'ala dil ka | हम न सुलझा पाए अब तक ये मसअला दिल का

  - Nakul kumar

हम न सुलझा पाए अब तक ये मसअला दिल का
हैं बड़ा ही पेचीदा सा ये रास्ता दिल का

ए'तिबार उस सेे इतना बड़ा लिया था क्यूँँ
वो न जाने कब तक यूँँ हीरहा ख़ुदा दिल का

सब अज़िय्यतें लौट आती थीं उस के जाते ही
बस यही रहा थाउस लड़की से गिला दिल का

ज़ेहन से तो मैं हूँ तेज़ आदमी मगर ऐ दोस्त
कोई ज़ेहन कब  कर पाया मुक़ाबला दिल का

रह-ज़नी करी थी उसने जहाँ मिरे दिल की
बंद कर चुके हैं हम अब वो रास्ता दिल का

हम को अक्स उसके चेहरे का ही गवारा हैं
टूट जाता हैं और चेहरों से ये आइना दिल का

  - Nakul kumar

Dost Shayari

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