नज़र में तो नयी-सी एक सूरत है
मगर दिल को पुराने से ही उल्फ़त है
क़रार आए झलक भर देख के जिसको
उसी को पाने में बेहद मशक़्क़त है
नज़र जो मुद्दतों के बाद आया आज
उसे आए नज़र हम अगर तो क़िस्मत है
न हैं पास और न वो मेरे मुकद्दर में
न जाने आशिक़ी भी कैसी आफ़त है
मैं यूँँ ही कशमकश में हूँ हमेशा से
मुझे ख़ुद से बड़ी सारी शिक़ायत है
मिरे अंदर जो हैं मौजूद इक दुश्मन
मिरा ये हाल उसकी ही बदोलत है
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