आज मेरे साथ चल कर
देख तो रस्ता बदल कर
है बहुत ज़ालिम ये दुनिया
मत जा इस दिल से निकल कर
आज फिर से दिल लगा नइँ
आ गए यूँ ही टहल कर
ग़म बहा कर फ़ाइदा क्या
ग़म सजा उन को ग़ज़ल कर
क्यूँ पुराना लग रहा है
साथ चल लहजा बदल कर
वो है बे-हद ख़ूब-सूरत
इश्क़ में तू ही पहल कर
मैं बदल दूँगा ये पहलू
देखना फिर हाथ मल कर
कोई तन्हाई में आ के
रोता है मुझ से निकल कर
ग़ैर आख़िर ग़ैर ही है
साथ रहना तू सँभल कर
एक ग़म पैहम रहा है
हर दफ़ा मंज़र बदल कर
— Nakul kumar















