मेरे लब से तेरे लब तक ज़माना है
यही तो फ़ासला हम को मिटाना है
क़रीब अपने तुझे अब इतना लाना है
मेरा बाज़ू तेरा तकिया बनाना है
मोहब्बत को लबों पर यूँ सजाना है
मुझे हर बार इशारों में बुलाना है
तेरे नाज़-ओ-अदा पर दिल दिवाना है
मुझे तुझ को हर इक क़ीमत पे पाना है
अगर बेचैन दिल को कुछ बताना है
तेरे सर के लिए मेरा ये शाना है
क़यामत मेरी ख़ातिर भी आ सकती है
तुम्हें बस मुझ से नज़रों को मिलाना है
— Nakul kumar















