bichhad ke tujh se mujhe kya qaraar aayega | बिछड़ के तुझ से मुझे क्या क़रार आएगा

  - Nakul kumar

बिछड़ के तुझ से मुझे क्या क़रार आएगा
तेरे ही वस्ल का फिर इंतिज़ार आएगा

वो सामने रहा यूँँ ही तो दिल सुनेगा नहीं
ये ना-समझ है उसे फिर पुकार आएगा

वो बन के बाद-ए-सबा हो गई कहीं रुख़्सत
न जाने अब कहाँ उसका दयार आएगा

ये ए'तिबार मुझे है मेरी मोहब्बत पर
वो लौट आएगा और बे-क़रार आएगा

तू बेवफ़ा न था तो बे-वफ़ाई कैसे हुई
सवाल सामने ये बार बार आएगा

ये ज़िंदगी है सहारा तो ढूँढ़ ही लेगी
तेरे बिना कोई और ग़म-गुसार आएगा

गुज़रने वाला ये मौसम मेरी हँसी ले चला
जो आने वाला है वो अश्क-बार आएगा

  - Nakul kumar

Khushi Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Nakul kumar

As you were reading Shayari by Nakul kumar

Similar Writers

our suggestion based on Nakul kumar

Similar Moods

As you were reading Khushi Shayari Shayari