फिर नया ग़म अगर यार देगा
'इश्क़ उसका मुझे मार देगा
मेरे महबूब का है हुनर ये
ग़म जो देगा मज़ेदार देगा
राब्ता तोड़ दूँ तुम से सब ये
मशवरा हर समझदार देगा
घर से बेहतर न संसार है दोस्त
बस निराशा ही संसार देगा
आज का सच नज़र में छुपा लो
कल ख़बर झूठी अख़बार देगा
दुश्मनी की लगाना ये तस्वीर
नफ़रतो की वो दीवार देगा
तोड़ दूँ मैं अगर अपना पिंदार
तब कहीं यार दीदार देगा
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