sabke chehre pe ye parda kyun hai | सबके चेहरे पे ये पर्दा क्यूँँ है

  - Nakul kumar

सबके चेहरे पे ये पर्दा क्यूँँ है
इस तरह आदमी जीता क्यूँँ है

ज़िंदगी मुझको ये बतला दे तू
कोई अच्छा है तो तन्हा क्यूँँ है

ख्वाहिशें हैं जिसे अपनाए हुए
वो हकीक़त में पराया क्यूँँ है

ग़म परेशान हो कर बोल उठे
दर्द सहता है तो हँसता क्यूँँ है

डूबता जाए है दिल अश्कों में
लेकिन आँखों पे ये सहरा क्यूँँ है

ख़ुदकुशी कहती है हम से पैहम
ऐसे जीना है तो जीना क्यूँँ है

बँट गया जिस्म हवस में लेकिन
अब तक आँखों में वो चेहरा क्यूँँ है

  - Nakul kumar

Emotional Shayari

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