क्या हाल मेरा हो गया तेरे बग़ैर
मैं तुझ में कितना खो गया तेरे बग़ैर
जो याद आया बाहो का जादू तिरा
मैं जागा जागा सो गया तेरे बग़ैर
ये बे-वफ़ाई रात हम से हो गई
सब दाग़-ए-दिल वो धो गया तेरे बग़ैर
तब ज़िंदगी की शाख़ पे बस फूल थे
अब काँटे कोई बो गया तेरे बग़ैर
— Nakul kumar















