वो मिला है हम को सफ़र यहाँ जो मेरा नहीं जो तेरा नहीं

है ये रास्ता कोई बद-ग़ुमाँ जो मेरा नहीं जो तेरा नहीं

जो मोहब्बतों में नहीं रहे हैं जो नफ़रतों में शुमार हैं
बना है उन्हीं का ही कारवाँ जो मेरा नहीं जो तेरा नहीं

जहाँ चाँदनी में है तीरगी जहाँ सुब्ह से न हो रौशनी
रहे हम उसी सर-ए-आसमाँ जो मेरा नहीं जो तेरा नहीं

किसी बात पर न मलाल है न ही दिल में कोई सवाल है
तो ये दर्द कैसा है दरमियाँ जो मेरा नहीं जो तेरा नहीं

ये उदासियाँ सभी शाम की ये जो मुश्किलें हैं तमाम सी
दे रहे हैं हम कोई इम्तिहाँ जो मेरा नहीं जो तेरा नहीं

— Nakul kumar

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