दिलों पे हुए जो सितम कैसे कैसे
बहकते गए हैं क़दम कैसे कैसे
मुहब्बत के मारो से तुम ये न पूछो
गुज़ारा है हर दिन सनम कैसे कैसे
ये दुनिया है ज़ालिम सताती रहेगी
यूँ पालो न दिल में भी ग़म कैसे कैसे
— Naviii dar b dar
बहकते गए हैं क़दम कैसे कैसे
मुहब्बत के मारो से तुम ये न पूछो
गुज़ारा है हर दिन सनम कैसे कैसे
ये दुनिया है ज़ालिम सताती रहेगी
यूँ पालो न दिल में भी ग़म कैसे कैसे
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