"वो एक शख़्स"
वो एक ख़लिश ऐसी मेरी
जो उम्र भर सारी रही
हम ही न उस के हो सके
जिस से थी वो यारी रही
वो माँगी थी जो दुआ
उस को ही पाने के लिए
इस ज़िंदगी से दोस्ती
फिर भी हमारी ही रही
वो शौक़ से मुझ को ही जो
अपना यूँ ही कहता रहा
फिर दिल में मेरे उस की भी
क्यूँ जंग ये जारी रही
— Naviii dar b dar















