मैं दिल के उन सवालों को भूलूँ कैसेवो बहकाते ख़यालों को भूलूँ कैसेमिली जो मुद्दतों से मंज़िल वो हम कोमैं उन पाँव के छालों को भूलूँ कैसे— Naviii dar b dar