उदास लोगों से प्यार करना कोई तो सीखे

सफ़ेद लम्हों में रंग भरना कोई तो सीखे

कोई तो आए ख़िज़ाँ में पत्ते उगाने वाला
गुलों की ख़ुश्बू को क़ैद करना कोई तो सीखे

कोई दिखाए मोहब्बतों के सराब मुझ को
मेरी निगाहों से बात करना कोई तो सीखे

कोई पयाम्बर कोई इमाम-ए-ज़माँ ही आए
असीर ज़ेहनों में सोच भरना कोई तो सीखे

— Neelma Naheed Durrani

More by Neelma Naheed Durrani

Other ghazal from the same pen

See all from Neelma Naheed Durrani →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling