जान लुटा चाहत पर हमने
लिक्खा है ये ख़त पर हमने
'इश्क़ नहीं करते, भूल हुई
सोचा नइँ सरवत पर हमने
बस तुम सेे बातें करनी थीं
रात बिता दी छत पर हमने
जो ग़ज़लें यार कहीं अब तक
सारी इक निस्बत पर हमने
शायर बनना ठीक लगा पर
मय नइँ पी फ़ुर्कत पर हमने
आप हमें मिल जाएँ, अब ये
छोड़ दिया क़िस्मत पर हमने
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