Nit
Nit
Ghazal

हसरतें क्यूँ हज़ार करते हो

प्यार क्यूँ बेशुमार करते हो

तोहफ़ा तो ख़ूब है तुम्हारा ये
नाज़ जिस पे हज़ार करते हो

हम मोहब्बत नहीं समझते हैं
कौन सा तुम ख़ुमार करते हो

अब चलो इश्क़ में उतरते हैं
साथ दरिया ये पार करते हो

साथ देना मिरा हमेशा तुम
हाँ अगर ऐतिबार करते हो

— Nit

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