फिर मुझे याद आ रहे हो तुम
क्यूँ दोबारा सता रहे हो तुम
आग तुम ने लगाई थी मुझ में
आग ख़ुद ही बुझा रहे हो तुम
अब मोहब्बत कभी नहीं करनी
जीते जी ये सिखा रहे हो तुम
मैं भटक कर कहाँ को जाऊॅंगा
यार जानी हुदा रहे हो तुम
— Nit
क्यूँ दोबारा सता रहे हो तुम
आग तुम ने लगाई थी मुझ में
आग ख़ुद ही बुझा रहे हो तुम
अब मोहब्बत कभी नहीं करनी
जीते जी ये सिखा रहे हो तुम
मैं भटक कर कहाँ को जाऊॅंगा
यार जानी हुदा रहे हो तुम
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