गुलाब हाथ में रख सर पे तितलियाँ रख ले
सभी पे प्यार लुटा रुख़ में नर्मियाँ रख ले
परोपकार किए जा बशर तू दुनिया में
किसी गरीब के ख़ातिर भी रोटियाँ रख ले
क़रीब ख़ुद ही चली आएगी तेरी मंज़िल
बस इतना कर कि गुनाहों से दूरियाँ रख ले
वतन पे आँच जो आए तो जान तक दे लुटा
कि दुश्मनों के लिए दिल में बिजलियाँ रख ले
मैं 'नित्य' तुझ को सिखाता हूँ याद रख ये सबक़
मसाफ़-ए-ज़ीस्त-ए-समंदर में कश्तियाँ रख ले
— Nityanand Vajpayee















