
धोके हज़ारों खा के वफ़ाएँ मैं क्यूँ करूँँ
अब उस के दर्द-ए-दिल की दवाएँ मैं क्यूँ करूँ
माना कि अब तलक न उसे बद-दुआऍं दीं
पर उस के वास्ते ये दुआएँ मैं क्यूँ करूँ
— Nityanand Vajpayee
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