मेरे अंदर जो भर गया मौसम
मुझ को बेबाक कर गया मौसम
तेरे चेहरे का आईना देखा
देख कर के निखर गया मौसम
रंग भर के जहाँ के गुलशन में
लौट कर अपने घर गया मौसम
झुक गई थी जहाँ तेरी नज़रें
बस वहीं पर ठहर गया मौसम
जल्दी जा कर उसे बुला लाओ
जाके देखो किधर गया मौसम
मैं बुलाता रहा था उस को पर
मुस्कुरा कर गुज़र गया मौसम
— Nitin Upadhye















