ऐसी तहरीर का उनवान नहीं होता है
ख़ैरियत लिखना कुछ आसान नहीं होता है
इश्क़ में आए ख़सारे का करें क्या अफ़सोस
कौन से काम में नुक़्सान नहीं होता है
इश्क़ का रोग अजब है कि नहीं मरता कोई
और बचने का भी इम्कान नहीं होता है
— Obaid Azam Azmi
ख़ैरियत लिखना कुछ आसान नहीं होता है
इश्क़ में आए ख़सारे का करें क्या अफ़सोस
कौन से काम में नुक़्सान नहीं होता है
इश्क़ का रोग अजब है कि नहीं मरता कोई
और बचने का भी इम्कान नहीं होता है
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