पाकिस्तान के सारे शहरो ज़िंदा रहो पाइंदा रहो
रौशनियों रंगों की लहरो ज़िंदा रहो पाइंदा रहो
बातिल से तुम कभी न डरना
ज़ुल्म कभी मंज़ूर न करना
अज़्मत-ओ-हैबत की दीवारो ज़िंदा रहो पाइंदा रहो
अक्स पड़ें जिस जगह तुम्हारे
चमकें ज़मीनें उन की ज़िया से
मेरे वतन के चाँद सितारो ज़िंदा रहो पाइंदा रहो
मौसम आएँ गुज़रते जाएँ
तुम पर रंग बरसते जाएँ
अर्ज़-ए-ख़ुदा पे महकते बाग़ो ज़िंदा रहो पाइंदा रहो
हक़ की रज़ा है साथ तुम्हारे
मेरी वफ़ा है साथ तुम्हारे
नए उजालों के सर-चश्मो ज़िंदा रहो पाइंदा रहो
— Obaidullah Aleem















