सुकूँ में था जब इस मुसीबत से पहले
वो दिन अब आ जाए क़यामत से पहले
रुलाएँगे हर रोज़ इक दूसरे को
ये कब तय हुआ था मुहब्बत से पहले
जभी जाता हूँ माँगने मैं दुआएँ
बिखर जाती हैं वो इबादत से पहले
ये हर रोज़ ही तेरे सैर-ए-जहाँ में
निकल जाता है दिल इजाज़त से पहले
पता है मुझे यार शातिर है मेरा
जुटा लूँ दलीलें शिकायत से पहले
बिछड़ कर वो क्यूँ आज बोला है मुझ से
नहीं सोचा कुछ मैं ने फ़ुर्क़त से पहले
— Prakash Pandey















