हमें क़िस्सा कैसा सुनाया गया है
जहाँ इश्क़ मरहम बताया गया है
ये कैसा सितम हम पे ढाया गया है
जो इन महफ़िलों में बुलाया गया है
तुम्हारे घर आने का मक़सद नहीं था
हमें तो ये रस्ता दिखाया गया है
हमारे ही जूठे गिलासों से पीकर
हमें मय का मतलब बताया गया है
वो तहरीर फिर से उभर नइँ सकेगी
जिसे आँसुओं से मिटाया गया है
ये रिश्ता कभी यूँ निभाना नहीं था
अभी जिस तरह से निभाया गया है
— Pravendra Anuragi















