तिरे दिल से अटका हुआ ये मुक़द्दरमुझे इश्क़ हासिल नहीं है घड़ी भरबिखरने लगा है तिरे हिज्र में अबमिरे ख़्वाबों से ये बनाया हुआ घरमुहब्बत की क़ीमत ही घटने लगेगीकिसी दिन जो मरने लगे सब सितमगर— Pravendra Anuragi