आख़िरी वक़्त तिरी राह से हट जाएँगे तू अगर हो गया राज़ी तो पलट जाएँगेतेरी नज़रों के तक़ाज़ों को तो सह लेंगे मगरहम तिरे लम्स की शमशीर से कट जाएँगेलौटते वक़्त वो माँगेगा ख़ुशी से रुख़्सतऔर हम रोते हुए उस से लिपट जाएँगे— Rahul Jha