बीच रस्ते मुकर गए होते
साथ जो रहगुज़र गए होते
आप को ख़ूब जानते हैं हम
आप होते तो मर गए होते
वक़्त हम को डरा नहीं पाता
वक़्त रहते जो डर गए होते
एक परिवार ख़ुश हुआ होता
साँझ ढलते जो घर गए होते
शब मुहब्बत जता रही होती
आप जो चूम कर गए होते
चाँद छत पर जो आ गया होता
रौशनी में उतर गए होते
— Atul K Rai















