इक दफ़ा बस इक दफ़ा उसको हमारे साथ कर
छत पे फिर से बैठ कर तारे गिनेंगे रात कर
खेल कोई हो विजयश्री प्रेम के हिस्से में लिख
जितने धोखेबाज़ हैं हिस्से में उनके मात कर
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