इक दफ़ा बस इक दफ़ा उस को हमारे साथ करछत पे फिर से बैठ कर तारे गिनेंगे रात करखेल कोई हो विजयश्री प्रेम के हिस्से में लिखजितने धोखेबाज़ हैं हिस्से में उन के मात कर— Atul K Rai