darwaaze ke andar ik darwaaza aur | दरवाज़े के अंदर इक दरवाज़ा और

  - Rajesh Reddy

दरवाज़े के अंदर इक दरवाज़ा और
छुपा हुआ है मुझ में जाने क्या क्या और

  - Rajesh Reddy

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As you were reading Shayari by Rajesh Reddy

    बना कर हमने दुनिया को जहन्नुम
    ख़ुदा का काम आसाँ कर दिया है
    Rajesh Reddy
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    जैसे ग़लत पते पे चला आए कोई शख़्स
    सुख ऐसे मेरे दर पे रुका और गुज़र गया
    Rajesh Reddy
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    मिरी मुश्किल ये आसानी है मेरी
    इसी से हर परेशानी है मेरी

    मैं क्यों चौंकूँ किसी के चौंकने पर
    मिरी आँखों में ह़ैरानी है मेरी

    नहीं वाक़िफ़ भले ही मुझसे दुनिया
    ये दुनिया जानी - पहचानी है मेरी

    वो "राधा" है मैं दीवाना हूँ जिसका
    वो "मीरा" है जो दीवानी है मेरी
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    Rajesh Reddy
    धोका है इक फ़रेब है मंज़िल का हर ख़याल
    सच पूछिए तो सारा सफ़र वापसी का है
    Rajesh Reddy
    कुछ परिंदों को तो बस दो चार दाने चाहिएँ
    कुछ को लेकिन आसमानों के ख़ज़ाने चाहिएँ

    दोस्तों का क्या है वो तो यूँ भी मिल जाते हैं मुफ़्त
    रोज़ इक सच बोल कर दुश्मन कमाने चाहिएँ

    तुम हक़ीक़त को लिए बैठे हो तो बैठे रहो
    ये ज़माना है इसे हर दिन फ़साने चाहिएँ

    रोज़ इन आँखों के सपने टूट जाते हैं तो क्या
    रोज़ इन आँखों में फिर सपने सजाने चाहिएँ

    बार-हा ख़ुश हो रहे हैं क्यूँ इन्ही बातों पे लोग
    बार-हा जिन पे उन्हें आँसू बहाने चाहिएँ
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    Rajesh Reddy

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