बे-सबब कब गिला किया मैं ने
बस बुरे को बुरा कहा मैं ने
मुझ को लोगों ने राही मान लिया
जबकि पहला क़दम रखा मैं ने
अब सफ़र का तो आप ही जानो
हाल-ए-रस्ता सुना दिया मैं ने
वक़्त हर बार ये बताता है
बीते लम्हों में क्या किया मैं ने
इम्तिहाँ में वही न काम आया
सब से ज़्यादा जिसे पढ़ा मैं ने
क्या पता फिर से तेरे काम आऊँ
ख़ुद को थोड़ा बचा लिया मैं ने
चल अँधेरे मुक़ाबला कर ले
रख दिया ताक पर दिया मैं ने
— Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'















