मुश्किल से तो इक शख़्स से रिश्ता था हमारा
और उस से भी हर रोज़ से झगड़ा था हमारा
हम को ही नहीं आया हुनर चलने का वर्ना
क़िस्मत ने कभी हाथ तो पकड़ा था हमारा
रात आ के बता कर गई है हम को हक़ीक़त
दिन तो किसी धोके में ही ग़ुज़रा था हमारा
सुन लेते थे हम दूसरों के दुख को कई बार
ख़ुश रहने का इक ये भी तरीक़ा था हमारा
हद तो ये है फिर भी नहीं हो पाई मोहब्बत
इस बार का तो शख़्स भी पूरा था हमारा
सोचा तो हमेशा तेरे पास आने का हम ने
पर रास्ते में पहले घर आता था हमारा
फिर उस ने हमें छोड़ना तो था ही ना रजनीश
जब रोज़ किसी और ही का रोना था हमारा
— Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'















