दर-ओ-बाम से लगता है साया मेरामैं किस तरह से अब सहारा दूँ ख़ुद कोबहुत देर कर दी है मिलने में मैं नेमिरे हाथ ख़ाली हैं मैं क्या दूँ ख़ुद को— Raj Tiwari