ये जो चेहरे की ख़ुश-लिबासी है
जश्न के बा'द की उदासी है
मुद्दतों दूर कर के छोड़ेगी
बात कहने को बस ज़रा सी
दोस्तो, बस क़ुबूल कर लेना
ख़्वाब ताज़ा हैं आँख बासी है
— Renu Nayyar
जश्न के बा'द की उदासी है
मुद्दतों दूर कर के छोड़ेगी
बात कहने को बस ज़रा सी
दोस्तो, बस क़ुबूल कर लेना
ख़्वाब ताज़ा हैं आँख बासी है
Other ghazal from the same pen
Shers of nigaah.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling