हम उन सेे दिल जो लगाए तो दिल-लगी आई
निगाह जब से मिली मुझ को आशिक़ी आई
मैं बेक़रार बहुत था उन्हीं से मिलने को
जब आए पास मेरे वो तो फिर ख़ुशी आई
हमें तो हँसते हुए भी निकल पड़े आँसू
कभी-कभी तो रुलाई में भी हँसी आई
भले न बात रही वो जो बात पहले थी
दुआ सलाम में फिर भी नहीं कमी आई
दिलों की बात जो नग़्मों में कर रहे ‘रोहित’
ख़याल-ए-यार में शायद सुख़नवरी आई
— Rohit Asthana Prabhav















