किताबें शहरस जंगल से फूल ला के दो
हमारे कमरे के दीवार-ओ-दर सजा के दो
हमारे ख़्वाब में तुम भी हो और गुलाब भी हैं
हमारे ख़्वाब में इक आइना लगा के दो
ये मोच आई मुझे आसमाँ से गिरने पर
किसी ने मुझ से कहा था कि चाँद ला के दो
मुझे भी शीश महल देखने की ख़्वाहिश है
मुझे उस आँख तलक रास्ता बना के दो
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Ruqayyah Maalik
our suggestion based on Ruqayyah Maalik
As you were reading Gulshan Shayari Shayari