ये दिल नादाँ है मेरी जान अक्सर भूल जाता है

नहीं रखता है कुछ भी ध्यान अक्सर भूल जाता है

वही इन्सां बनाता है दिलों में इक जगह अपनी
किसी पर कर के जो एहसान अक्सर भूल जाता है

तेरी कुछ आदतें इक बे-वफ़ा से मिलती जुलती हैं
कि तू भी तोड़ कर अरमान अक्सर भूल जाता है

निशानी ख़ानदानी है ज़मीं और ये पुराना घर
मगर ये आज का इंसान अक्सर भूल जाता है

भरोसा टूट जाना है बड़े घर -द्वार से उस का
भिखारी देख कर दालान अक्सर भूल जाता है

ख़ुदा को याद करता है गरीब इंसान कुछ पाकर
मगर इस बात को धनवान अक्सर भूल जाता है

मोहब्बत का चलन ऐ 'सारथी' उस को सीखा देना
वो दिल को तोड़ कर नादान अक्सर भूल जाता है

— Saarthi Baidyanath

More by Saarthi Baidyanath

Other ghazal from the same pen

See all from Saarthi Baidyanath →

Aarzoo Shayari

Shers of aarzoo.

All Aarzoo Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling