ज़ईफ़ी आ गई बच्चा नहीं हूँ

जहाँ में शोर है अच्छा नहीं हूँ

उसी दम ख़ुद-ब-ख़ुद मर जाऊँगा मैं
जो कोई बोल दे सच्चा नहीं हूँ

मैं गुज़रे दौर का सिक्का हूँ माना
मगर तेरी तरह सस्ता नहीं हूँ

नहीं मिलती है तेरी सोच मुझ से
लिहाज़ा मैं तेरे जैसा नहीं हूँ

उलझना तो ज़रा बच कर उलझना
मैं अच्छा हूँ बहुत अच्छा नहीं हूँ

ये दुनिया सोचती है सबका हूँ मैं
मैं सबका हूँ मगर दुनिया नहीं हूँ

अगरचे ज़िंदा जैसा लगता हूँ मैं
हक़ीक़त है कि मैं ज़िंदा नहीं हूँ

ग़लत-फ़हमी में रहना छोड़ दे तू
मैं तेरा चाहने वाला नहीं हूँ

बहुत मुश्किल है मुझ से पार पाना
मैं सागर हूँ कोई दरिया नहीं हूँ

— Saarthi Baidyanath

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