कभी कहीं जो मिलो तो तुम पे मैं सारा ग़ुस्सा उतार लूँगातुम्हारे माथे को चूम कर मैं तुम्हारा सदक़ा उतार लूँगाउदास लम्हों में मैं कभी भी तुम्हें अकेला न रहने दूँगामैं अपनी ज़ुल्फ़ें बिगाड़ लूँगा मैं अपना चेहरा उतार लूँगा— Sagar Kaushik